लेस्बियन लड़कियाँ

न्यू अनुभव चुदाई की कहानी – Part 05

Lesbians – लेस्बियन लड़कियाँ – Antarvasna Desi Hindi Sex Stories लड़कियाँ दो औरतों के बीच यौनांगों को चाटने चूसने की कहानियाँ सैक्स कहानियाँ

लेस्बियन लड़कियाँ

उसकी बातों से साफ झलक रहा था के वो बहुत समझदार और अनुभवी मर्द है।उसने मुझे दोबारा कहा “जब से
तुम्हारी फ़ोटो देखी तब से मिलना चाहता था आज मिली पर तुम खुल कर नही मिली”।

उधर तारा और मुनीर भी हमारी तरफ देखने लगे,तारा ने मुझसे पूछा अभी तो तुम अच्छी खासी थी अचानक क्या हुआ।में चुपचाप थी और धीरे धीरे अपने कपड़े सही करती रही ।तारा मेरे पास गई और मुझसे पूछने लगी के आखिर बात क्या थी।मेरी जगी हुई चिंगारी शांत हो गयी थी,में बहुत असमंजस में थी समझ नही आ रहा था क्या कहूं।तभी मैंने तारा से कहा माइक मेरे साथ क्या करना चाहता है।

तारा की जगह माइक ने खुद जवाब दे दिया के जिसके लिए वो आया है बस वही करना चाहता है।सीधे सब्दो में उसने खुल के कह दिया “ आखिर तुम्हारी तरह कामुक महिला किसी मर्द के साथ होगी तो संभोग करने की लालसा जागेगी ही,मैं भी सभोग करना चाहता हु और अगर तुम्हें नही पसंद तो मैं जबरदस्ती नही करूँगा”।उसकी ये बात सुन कर तो मै भीतर से सिहर गयी मन मे केवल एक बात थी के इतना बड़ा लिंग मेरी छोटी सी यौनी में कैसे जाएगा। मैंने तारा के कान में धीरे से कहा “माइक का लिंग बहुत बड़ा है

मैं बर्दास्त नही कर पाऊंगी”।इस पर तारा जोर जोर से हसने लगी और दोनो को बता दी के मैं माइक के लिंग से डर गई।माइक और मुनीर भी जोर जोर से हसने लगे।मुनीर ने मुझे कहा तुम इतनी उम्र की हो फिर भी बच्चो जैसी बातें करती हो।उसने कहा अगर मजे करने है

तो इन सब बातों को दिमाग मे नही लाना चाहिए,और असली मजा तो दर्द में ही है।उसने मुझे समझना शुरू कर
दिया के औरत की यौनी तो रब्बर की तरह होती है।मैं भी हर बात जानती हूं पर पता नही उस वक़्त मैं सच मे डर गई थी शायद पहली बार किसी ऐसे मर्द को देख रही थी इसलिए।मुनीर की बातें मुझे समझ गयी थी फिर भी मेरा मन नही माना।मुनीर फिर बिस्तर पर गयी और एक डब्बा उठा लायी उसने मुझे दिखाते हुए बोला देखो ये
चिकनाई के लिए प्रयोग करते है तुम्हें बस मजा आएगा दर्द बिल्कुल भी नही होगा।

उधर तारा ने मुझे ताने मारने शुरू कर दिए,उसने कहा जो औरत एक बार मे 4 मर्दो को गिरा सकती है छोटी सी बात पे दर गयी।तुम बहुत खुले विचारों की औरत हो और जीवन मे मजा करने के लिए जब इतना कष्ट उठा सकती हो तो यहां आकर रुक क्यो गयी।उसने मुझे कहा जीवन मे कुछ नया करना चाहिए क्या पता क्या कुछ मिल जाये।एक न एक दिन सब खत्म हो जायेगा मौका है मजा कर लो।उसकी बातों से मेरे अंदर हिम्मत जगी और थोड़ा सोचने के बाद मैंने हाँ कर दिया।माइक के तो जैसे चेहरे पे चाँद चमकने लगा।उसने खुसी दिखाते हुए मुझे झुक कर मेरे होठो को चूम लिया।उसने मुझे हाथ पकड़ कर उठाया और कहा “में तुम्हे जड़ भी तकलीफ नही होने दूंगा,पूरे आराम से करूँगा

ताकी तुम्हे ज्यादा से ज्यादा मजा आये”।मुनीर और तारा ने एक साथ कहा “तुम्हे चिंता करने की जरूरत नही”।तारा ने कहा “ हम सब तुम्हारे साथ है।हम दोनों देखेंगे तुमदोनो को मजे करते”।तारा मुझे पकड़ कर बिस्तर के पास ले गयी और मुझे निर्वस्त्र करना चाहा।मैंने उसे रोक लिया तब उसने मुझसे कहा बहुत जिद्दी हो तुम।मुझे हल्का धक्का देकर बिस्तर पर गिरकर माइक के और चली गई।वहां मुनीर पहले से ही घुटनो के बल खड़ी होकर माइक का लिंग चूस रही थी।तारा ने माइक के गले मे हाथ डाल कर उसको चूमा और कहा “तुम्हारी मनोकामना पूरी होने वाली है”।माइक ने भी जवाब में तारा की चूतड़ों को दबोच अपनी और जोर से दबाया फिर उसके ब्रा के हक खोल उसके स्तनों को आजाद कर स्तनपान करने लगा।मुनीर पूरी ताकत से माइक के लिंग को पकड़ हिला हिला कर चूस रही थी।

थोड़ी देर बाद तारा नीचे झुकी और मुनीर के साथ लिंग को बारी बारी चूसने लगी।कुछ पल के बाद तारा नीचे घुटनो के बल खड़ी होकर चूसने लगी और मुनीर उठ कर मेरी और आने लगी।वो अब भी उस रब्बर के लिंग को पहनी हुई थी, मुझे मन ही मन हसी आरही थी।मेरे पास आते ही उसने मेरे चेहरे को पकड़ मेरे होठो को चूम लिया फिर मुझे बिस्तर पर लिटा दिया।मेरी टांगे बिस्तर से बाहर लटक रहे थे।मुनीर ने पहले मेरे पल्लू को स्तनों के ऊपर से हटाया फिर ब्लाउज से बाहर स्तन के हिस्से को चूमती हुई बोली “तुम कितनी कामुक महिला हो तुम्हारा बदन ऐसा है के कोई भी मर्द तुम्हे पाने को पागल हो जाये”।उसने धीरे धीरे मुझे छुमते हुए मेरी टांगो की तरफ चली गयी।फिर मेरी साड़ी को उसने उठा कर कमर तक कर दिया।

मेरी टांगो को उठा उसने बिस्तर पर मोड़ कर टिका दिया।उसके बाद उसने मेरी जांघो को फैला कर मेरी यौनी को दो उंगलियों से फैलाया और बोली “तुम तो ठंडी हो गयी हो गरम करने पड़ेगा”।फिर क्या था उसने अपने जीभ और होठो के सहारे मेरी यौनी से खेलना शुरू कर दी।सच कहु तो मुनीर इस खेल में माहिर थी,उसे पता था कैसे किसी को उत्तेजित करने है।उसने जिस प्रकार से मेरी यौनी को चाटना शुरू किया के कुछ ही पल में मुझे लगने लगा के में झड़ जाऊंगी।उसने मेरी यौनी के दाने पर तेज़ी से अपनी जीभ फिरानी शुरू की के में खुद ही उठ कर उसके सिर को पकड़ ली।

मुनीर समझ गयी के अब मैं काफी गरम हो चुकी हूं।उसने माइक को आवाज दिया,तारा ने भी माइक को कहा तुम अब तैयार हो जाओ उसे पूरा मजा दो। माइक मेरी और आया तो मुनीर उठकर मेरे बगल में बैठ गयी।माइक नीचे झुका और पहले उसने मेरी जांघो को चूम फिर यौनी को चाटने लगा।में इतनी उत्तेजित हो चुकी थी के मैन उसके सिर को जोर से पकड़ लिया।तारा तभी मेरे दूसरी तरफ आकर बैठ गयी और बोली “माइक अब देर मत कर”।मैंने अभीतक माइक के लिंग को हाथ नही लगाया था

इतनी डर गयी थी मैं।माइक उठकर मेरे ऊपर गया वो मुझे देख कर मुस्कुराया और बोला “तुम्हारा बदन कमाल का है,और यौनी उससे भी ज्यादा कमाल का है”।उसने बातें करते हुए मेरी जांघो को फैला बीच मे गया।मेरी नजर केवल उसके लिंग पर जा रही थी।माइक इतना उत्तेजित था के उसका लिंग खुद ही ऊपर नीचे झटके ले रहा था।माइक थोड़ा और झुका अपनी स्थिती बनायी संभोग के लिए वो इतना चौड़ा था के मुझे अभी से ही ऐसा लग रहा था जैसे मेरी जाँघे चिर रही।मैं अभी भी डरी हुई थी और जैसे जैसे उसका लिंग मेरी यौनी के नजदीक रहा था मेरी धड़कन बढ़ती जा रही थी। मैंने अपनी टांगे मोड़ ली और उसके पेट पर टिका दिया ताकी अगर उसने ज्यादा जोर लगाया तो मै रोक लू साथ ही मैंने दोनो हाथो से उसके कमर को भी पकड़ रखा था।मैंने भी खुद को तैयार कर लिया था,फिर दिमाग को समझने में लग गयी के जो होगा देखा जाएगा।माइक ने अब अपना लिंग एक हाथ से पकड़ा और मेरी यौनी की दरार में सुपाड़े को थोड़ा रगड़ा।

उसके लिंग के स्पर्श से मेरा पूरा बदन सिहर उठा,ऐसा लगा जैसे एक पतली सी बिजली का करंट मेरी यौनी की निचली हिस्से से होता हुआ गर्भसाय से नाभी तक आया हो।उसका लिंग किसी पत्थर से व्यतीत हो रहा था मुझे,एकदम कठोर लग रहा था।उसने मेरी यौनी द्वार फिर से टटोला और छेद मिलते ही उसने अपने लिंग को टिका कर धकेला।सुपाड़ा बस थोड़ा घुसा के मुझे महसूस हुआ जैसे मेरी यौनी चिर रही,मैंने कराहते हुए तुरंत उसका लिंग दाये हाथ से पकड़ रोक लिया उसे।ये पहली बार था

जब मैंने उसके लिंग को पकड़ा,सच मे एकदम पत्थर की तरह कठोर था।केवल उसकी चमड़ी ही मुलायम लग रही थी और अंदर का हिस्सा उत्तेजित होकर बहुत कठोर हो गया था। मेरे द्वारा लिंग को पकड़े जाने से माइक रुक गया और बोला “माफ करना में शायद कुछ ज्यादा ही जल्दी में था”।एक वयस्क और राजुर्बेदार मर्द की यही तो पहचान होती है की वो अपने साथी को हमेशा जताता है के उसका खयाल रखेगा।माइक भी वैसे ही मेरे साथ कर रहा था।माइक के ऐसे बर्ताव से मैं भी पिघल सी गयी और मैंने खुद ही लिंग को सही रास्ता दिखाने लगी।मैन हाथ से ही पकड़ कर लिंग का सुपाड़ा अपनी छेद पे लगा दिया…